निजी अस्पतालों में महंगे इलाज पर राज्यसभा में सांसद विशम्बर प्रसाद ने सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली (New Delhi), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट। संसद के वर्तमान सत्र में राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद श्री विशम्बर प्रसाद निषाद जी ने निजी अस्पतालों में महंगे इलाज पर सरकार से प्रश्न के माध्यम से जबाब मांगा। अपने सबाल में सांसद श्री विशम्बर प्रसाद निषाद ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री से जानना चाहा कि क्या यह सच है कि सरकारी


- अस्पतालों की तुलना में प्राइवेट अस्पतालों में इलाज अधिक महंगा है ?


- निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों से वसूले जाने वाले अनुचित प्रभारों के सम्बंध में कितनी शिकायतें प्राप्त हुई हैं ?


- निजी अस्पताल किन किन प्रावधानों के अंतर्गत उनके उपचार के लिए प्रभार वसूलते हैं ?


- क्या सरकार निजी अस्पतालों द्वारा उपचार के लिए प्रभार निर्धारित करने हेतु कोई किफायती फार्मूला तय करने पर विचार कर रही है ?


- यदि हाँ तो कब तक और नहीं तो, क्या सरकार निजी अस्पतालों को मरीजों से अधिक राशि वसूलने की छूट दिये जाने को व्यापक रूप में जन हितैषी मानती है -


   इन प्रश्नों के उत्तर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा आपके सभी प्रश्नों के जबाब सदन के पटल पर रख दिए हैं।


    स्वास्थ्य राज्य का विषय है। अस्पताल सेवाएं समेकित स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा हैं जिन्हें सबंधित राज्य सरकार द्वारा विनियमित किया जाता है। राट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) द्वारा जनवरी से जून, 2014 के बीच किए गए राट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 71 वें दौर की रिपोर्ट के अनुसार, निजी अस्पतालों में प्रति अस्पतालीकरण औसत चिकित्सा व्यय सरकारी अस्पतालों की तुलना में अधिक था। तथापि, यह राज्य मरकार की जिम्मेदारी है कि वह निजी अस्पतालों द्वारा अकारण प्रभार लिए जाने की घटनाओं का संज्ञान लें और इस तरह की परिपाटियों की रोकने और नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करें। ऐसे मामलों का विवरण केंद्र द्वारा नहीं रखा जाता है।


   भारत सरकार ने चिकित्सा की मान्यताप्राप्त पद्यतियों से जुड़े सरकारी (शसत्र बलों को छोड़ कर) और निजी क्लिनिकल प्रतिष्ठानों के पंजीकरण और विनियमन के प्रावधान के लिए क्लिनिकल प्रतिष्ठान (पँजीकाण और विनियमन) अधिनियम, 2010 (सीई अधिनियम, 2010) अधिनियमित किया है और इसके तहत क्लिनिकल प्रतिष्ठान (केंद्र सरकार) नियम, 2012 अधिसूचित किए हैं। जिन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने सीई अधिनियम, 2010 को लागू किया है वे इस अधिनियम और इसके तहत वने नियमों के उपबंधों के अनुसार निजी अस्पतालों सहित अपने अम्यतालों को विनियमित करने के लिए प्राथमिक रूप से उत्तरदायी हैं ताकि रोगियों कों सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य परिचर्या का प्रावधान सुनिश्चित किया जा सके। इस अधिनियम के अनुसार क्लिनिकल प्रतिष्ठानों की सुविधाओं और सेनाओं के न्यूनतम मानक कार्मिकों की न्यूनतम आवश्यकता, रिकॉर्डों और रिपोर्टों का रख रखाव तथा केंद्र/राज्य सरकार द्वारा जारी मानक उपचार के दिशा…निर्देशों (एसटीजी) का अनुपालन सहित अन्य शर्तों को पूरा करना तथा उनके द्वारा प्रभारित दरों को किसी सुस्पष्ट स्थान पर प्रदर्शित करना आवश्यक होता है। अधिनियम के तहत गठित किए गए एक सांविधिक निकाय 'क्लिनिकल प्रतिष्ठानों हेतु राष्ट्रीय परिषद ने चिकित्सीय प्रक्रियाओं की मानक सूची और चिकित्सीय प्रक्रियाओं के लागत निर्धारण के लिए मानक टेम्पलेट अनुमोदित किया है और इसे उन राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के साथ साझा किया गया है जहां सीई अधिनियम, 2010 लागू है, ताकि राज्यों द्वारा उपयुक्त कार्रवाई की जा सके।


     फिलहाल सीई अधिनियम. 2010 को 11 राज्यों (सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचन प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उस्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, उत्तराखंड, असम और हरियाणा) और पांच संघ राज्य क्षेत्रों (दिल्ली, जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख की छोडकर सभी संघ राज्य क्षेत्र) द्वारा लागू किया गया है। 16 राज्यों और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का अपना स्वयं का अधिनियम है और 3 अन्य ने न तो सीई अधिनियम, 2010 कों अपनाया है और न ही इनका कोई अपना अधिनियम है। केंद्र सरकार क्लिनिकल प्रतिष्ठानों से संबंधित विधान को सख्ती से मागू करना सुनिश्चित करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से आग्रह कराही है ताकि मानकों कों बनाए रया जा सके। अच्छी गुणवता वाली सेवा प्रदान की जा सके और खराब सेवा प्रदान करने या अधिक प्रभार लगाने की शिकायतों पर कार्रवाई की जा सके।


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