एकलव्य मानव संदेश ने 24 साल पूरी करके किया 25 वें साल में प्रवेश

अलीगढ़। आज एकलव्य मानव संदेश 24 साल पूरी करके 25 वें साल में प्रवेश कर रहा है। सभी सहयोगी, शुभ चिंतकों, रिपोर्टरों, पाठकों और मेरे परिजनों के अभूतपूर्व सहयोग के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
आप सभी के और बेहतर सहयोग की अभिलाषा के साथ साथ सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई और हमारे वीर शहीदों- वीरांगना फूलन देवी जी जिनकी प्रेरणा से यह समाचार पत्र प्रारंभ किया गया था और उनके संरक्षक चौधरी चाचा हरफूलसिंह कश्यप जी (दिल्ली) के कर कमलों से सरदार थान सिंह जोश (दिल्ली), वैध नंद किशोर जी (मेरे जन्मस्थान नगला मल्लाह, अलीगढ़ महानगर), बौद्ध चिंतक श्री वी.एम.नागर जी (अलीगढ़), श्री जगदीश प्रसाद निषाद जी (मथुरा वाले, तत्कालीन मत्स्य विभाग अलीगढ़ में बाबू), श्री अमर सिंह कश्यप जी (अलीगढ़), आदि की गरिमामयी उपस्थित में उठाये गए इस कदम मजबूती के साथ निरंतर आगे ले जाने के लिए हमेशा प्रयास जारी रहेगा। 
   आज से 24 साल पहले जो चुनौती महसूस की गई थी वह आज भी समाज के सामने विकराल रूप धारण कर मनुवादी विचार धारा को मजबूत करने वाले संगठनों की बढ़ती सक्रियता से तेजी से आगे बढ़ रही है, इससे समाज के गरीब, कमजोर, दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक को जागरूक करने की जिम्मेदारी एकलव्य मानव संदेश पर और बढ़ गई है। आशा करता हूँ कि आप इस लड़ाई में हमारे साथ आकर अपना सहयोग एक प्रचारक, एक रिपोर्टर, एक अच्छे लेखक या कवि, एक पाठक, एक विज्ञापनदाता आदि तरीकों देते रहेंगे।
    अब एकलव्य मानव संदेश केवल समाचार पत्र ही नहीं रह गया है, वल्कि यह एक आंदोलन बन गया है। आज इसका डिजिटल चैनल न केवल भारत देश वल्कि दुनिया के अनेकों देशों में भी लोकप्रिय हो रहा है। 
आप अपना सहयोग जिस भी तरह से हो हमको देते हुए सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई में साथ रहेंगे, इसी अभिलाषा के साथ एकबार पुनः सभी को धन्यवाद।
आपका अपना साथी
जसवन्त सिंह निषाद
संपादक, प्रकाशक, स्वामी
कुआरसी
रामघाट रोड 
अलीगढ़,
उत्तर प्रदेश
पिन कोड 20202
ईमेल: eklavyamamavsandesh@gmail.com
मोबाईल/व्हाट्सएप नम्बर्स
9219506267, 9457311672


एकलव्य मानव संदेश हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र 28 जुलाई 1996 को अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से प्रारंभ हुआ था जिसका डिजिटल चैनल 16 अप्रैल 2017 को अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से ही प्रारंभ हुआ था। जिसके माध्यम से आप पूरी दुनिया में कहीं भी ऑनलाइन खबरें और वीडियो भी देख सकते हैं-


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(24 जुलाई 1996 को प्रकाशित एकलव्य मानव संदेश की कॉपी एक बार फिर आपके लिए)