14.09.2020 को सभी जिलों में 17 जातियों के आरक्षण के लिए इस ज्ञापन को अपने संगठन के नाम से जिलाधिकारी को दें

दिनांक ........

महामहिम राष्ट्रपति जी
राष्ट्रपति भवन
नई दिल्ली
द्वारा जिलाधिकारी .....................  उ.प्र.

ज्ञापन

विषयः 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में परिभाषित कराने हेतु 

महोदय,
आपके माध्यम से ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति जी के लिए प्रस्तुत है, जो मछुवा समुदाय की उपजातियां उ0प्र0 की अनुसूचित जाति की सूची के क्रम सं0-18 में बेलदार, क्रम सं0-36 में गोंड, क्रम सं0-53 में मझवार, क्रम सं0-66 में तुरैहा हैं जो मछुवा समुदाय की कहार कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, धीवर, बिन्द, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी, मछुवा उपजातियां क्रम सं0-18. बेलदार के साथ बिन्द, क्रम सं0-36. गोंड़ के साथ गोड़िया कहार कश्यप, बाथम क्रम सं0-53. मझवार के साथ मल्लाह केवट मांझी, निषाद मछुवा व क्रम सं0-66. तुरैहा के साथ तुरहा, धीमर, धीवर, क्रम सं. 59 पासी तरमाली के साथ भर, राजभर व क्रम सं0-65 में शिल्पकार जो कुम्हार, प्र्रजापति की पर्यायवाची उपजातियों को परिभाषित किया जाना है। उक्त जातियों का आपस में रोटी-बेटी का रिश्ता है। खान-पान, रहन-सहन एक ही है। 
  उ.प्र की 17 पिछड़ी जातियां जिसमें कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी, मछुवा, भर, और राजभर जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने हेतु उ0प्र0 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, लखनऊ के माध्यम से प्रश्नगत 17 जातियों के सम्बन्ध में विस्तृत अध्ययन कराया गया था। संस्थान द्वारा किये गये अध्ययन तथा उनकी रिपोर्ट भारत सरकार के पत्र सं0-12016/25/2001-एस.सी.डी.(आर.एल. सेल) यू0पी0 दिनांक-11.04.2008 द्वारा चाही गयी 18 बिन्दुओं पर सूचनाएं राज्य सरकार को उपलब्ध करायी गयी थी। 17 जातियां अनुसूचित जाति में शामिल किये जाने की सभी पात्रताएं, अर्हताएं और योग्यताएं रखती है विस्तृत नृजातीय अध्ययन रिपोर्ट सहित सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली को 15.02.2013 को  भेजा गया था। भारत सरकार ने  महारजिस्ट्रार को विचार-विमर्श हेतु प्रस्ताव दिनांक-19.02.2013 को भेजा था। जिसमें महारजिस्ट्रार ने अपने पत्र दिनांक-24.03.2014 द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार से टिप्पणी के आलोक में प्रस्ताव के औचित्य की पुनर्समीक्षा करने का अनुरोध किया गया था।  यह बात भी गौर करने योग्य है कि ये जातियां/उप जातियां कई राज्यों में अनुसूचित जाति में हैं तो कई में अन्य पिछडे वर्ग में, इसलिए भी इन्हें एक समान अनुसूचित जाति में करने की आवश्यकता है। देश में रोजगार की कमी होने के कारण देश के विभिन्न राज्यों में उक्त समुदाय के लोग निवास कर रहे हैं, जिनको सामान्य श्रेणी में गिना जाता है। इसलिए 2021 में प्रस्तावित जनगणना में जातिवार जनगणना करा कर संख्या के आधार पर आरक्षण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
अतः आपसे अनुरोध है कि उत्तर प्रदेश की 17 पिछड़ी जातियां- कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी, मछुवा, भर, और राजभर जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने हेतु सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार को संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाकर इन जातियों को अनुसूचित जाति में परिभाषित करने हेतु आवश्यक संस्तुति करने की कृपा करें जिससे वर्षों से न्याय की ताक में इन जातियों की आने वाली पीढ़ी पढ़-लिखकर अपनी सामजिक स्थिति मजबूत करने में सक्षम हो सकती है।
सादर,
प्रार्थीगण
नोट- साथियों से अनुरोध है कि 14 सितंबर, 2020 को अपने-अपने संगठनों के माध्यम से अपने जिले के जिलाधिकारी को उक्त ज्ञापन बड़े पैमाने पर देने का कष्ट करें और इसकी सूचना माननीय विशम्भर प्रसाद निषाद, सांसद राज्य सभा के वाट्सअप नंबर 9013181177 पर भी दें।


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