भारत बन्द विभिन्न संगठनों ने किसानों की मांगों के समर्थन में पूरे देश में प्रर्दशन कर दिए ज्ञापन

एकलव्य मानव संदेश समाचार। आज किसानों और उनके समर्थन में आयोजित भारत बन्द पर पूरे देश में प्रर्दशन और ज्ञापन देने की खबर हैं। ललितपुर से हमारे रिपोर्टर लोकेश कुमार रायकवार की रिपोर्ट में कहा गया है कि आज सपा सहित विभिन्न संगठनों ने किसानों की मांगों के समर्थन में ज्ञापन दिए।



   21 सितम्बर को अलीगढ़ में भी सपा ने जबरदस्त प्रदर्शन के बाद उपजिलाधिकारी कोल को ज्ञापन दिया था।



   उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख श्री अखिलेश यादव जी ने ट्वीट करते हुए लिखा है- आज देश के हमारे अपने किसानों के साथ हर नागरिक को खड़ा होना होगा। भाजपा सरकार एमएसपी व मंडी के नाम पर सारा ध्यान फ़सल की ख़रीद-फ़रोख़्त में लगा देना चाहती है, जबकि भाजपा का असली उद्देश्य कृषि भूमि पर अप्रत्यक्ष क़ब्ज़ा करना है।
    राजस्थान के किसानों के हिंसक प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी ने अपने ट्वीट में लिखा है- डूंगरपुर में उपद्रव एवं हिंसक प्रदर्शन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। विरोध करने के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल हो, शांतिपूर्ण प्रदर्शन हों लेकिन कानून को अपने हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है। प्रदर्शनकारियों से मेरी अपील है कृपया शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
आप नेता संजय सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा है- किसान अकेला नहीं है उसके 
साथ देश के करोड़ों लोग खड़े हैं। 


नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान 2022 तक किसानों की आमदनी बढ़ाने का वादा किया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में इस वादे को पूरा करने की दिशा में कुछ खास नहीं किया।
   हाल ही में मोदी सरकार ने कथित रूप से भारतीय किसानों की पीड़ा खत्म करने वाले तीन ‘ऐतिहासिक’ विधेयकों को पारित किए हैं। सत्ता शीर्ष पर बैठे लोगों को अचानक दशकों से संकटों का सामना कर रहे किसानों की चिंता इस कदर सताने लगी की भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दलों के बीच यह मुद्दा विवाद का केंद्र बन गया और मंत्रिमंडल से हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे की नौबत तक आ गई। यदि ये वास्तविक तत्परता है तो फिर किसानों के मुद्दे भारत के राजनीतिक दलों के विधायी एजेंडे में अभी तक क्यों नहीं आ पाए थे? कृषि बिल के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में किसानों का हल्ला बोल जारी है। 
   हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं ने भी बिल को किसान विरोधी करार दिया है। बीजेपी नेता परमिंदर सिंह ढुल और रामपाल माजरा का कहना है कि केंद्र द्वारा लाया गया बिल किसानों के हित का नहीं है, क्योंकि इसमें एमएससी की बात नहीं की गई है। इन भाजपा नेताओं का कहना है कि इस बिल के खिलाफ जो भी किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बीजेपी नेता परमिंदर सिंह ढुल ने कहा कि ये बिल सर छोटू राम के सपनों के खिलाफ हैं, ऐसे में हम इनका समर्थन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट में जब देश के सामने संकट आया तो किसानों ने ही अर्थव्यवस्था को जारी रखा, लेकिन अब किसान सड़क पर हैं और कोई उनकी बात नहीं सुन रहा है। नेता ने दावा किया कि उन्होंने बिल के मसले पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनकड़ से बात की है और ऐसा बिल लाने को कहा है जिसमें एमएसपी को शामिल किया जाए। जब किसान के पास एमएसपी की गारंटी होगी तो कोई परेशानी नहीं होगी।
   रामपाल माजरा ने कहा कि किसानों की बात सुननी जरूरी है, ऐसा नहीं होना चाहिए कि आगे चल कर एक गरीब किसान किसी बड़ी कंपनी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हो। माजरा ने कहा कि भले ही वो भाजपा में हैं लेकिन सही के लिए आवाज जरूर उठाएंगे।
   कृषि से जुड़े जिन तीन विधेयकों को लाया गया है, उसके खिलाफ कई किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। हरियाणा में ये प्रदर्शन काफी आक्रामक हुआ है, जहां प्रशासन ने किसानों पर लाठीचार्ज भी किया था।
इस आपदा में अन्नदाता ने देश को भुखमरी से बचाया है और भाजपा सरकार उन्ही को पूंजीपतियों के हाथों बेच रही है।
ये समय देश के अन्नदाता के साथ खड़े होने का है।


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