हाथरस में सवर्णों की दरिन्दगी की शिकार दलित बाल्मीकि बेटी की दिल्ली में हुई मौत

चंदपा, हाथरस, उत्तर प्रदेश (Chandpa, Hathras, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 29 सितम्बर 2020। हाथरस में सवर्ण ठाकुरों द्वारा गैंगरेप पीड़िता बेटी की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत। 14 सितंबर को चंदपा थाना क्षेत्र के गांव बूलगढ़ी में युवती के साथ हुई थी दरिंदगी। गैंगरेप के बाद जान से मारने का किया गया था प्रयास। युवती का चल रहा था उपचार। सोमवार को रेफर की गई थी दिल्ली के एम्स के लिए, लेकिन दिल्ली सफदरजंग अस्पताल में की गई भर्ती और वहीं इलाज के दौरान हुई मौत। युवती के परिजनों में मचा कोहराम। हाथरस पुलिस अलर्ट मोड पर। युवती के गांव में की फोर्स की तैनाती आला अधिकारी मौके पर।


(फ़ोटो साभार)


   हाथरस जनपद में सवर्णों की हैवानियत का शिकार हुई दलित वाल्मीकि जाति की बेटी गुड़िया जिंदगी से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जंग हार गई। थाना चंदपा इलाके के गांव में 14 सितंबर को चार दबंग युवकों ने 19 साल की दलित लड़की के साथ बाजरे के खेत में गैंगरेप किया था। इस मामले में पुलिस ने लापरवाही भरा रवैया अपनाया। रेप की धाराओं में केस ना दर्ज करते हुए छेड़खानी के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया। इसके बाद उसके खिलाफ धारा 307 (हत्या की कोशिश) में मुकदमा दर्ज किया गया था।
    गैंगरेप के बाद हैवानों ने उसकी जीभ काटने के साथ ही उसकी गर्दन और रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई थी। इस जघन्य और मानवता को शर्मशार करने वाली घटना के एक हफ्ते से ज्यादा समय तक बेटी बेहोश रही थी। अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पीड़िता का इलाज चल रहा था। सोमवार को हालत खराब होने के बाद बिटिया को एम्स दिल्ली के लिए रैफर किया गया था लेकिन उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान मंगलवार की सुबह लगभग चार बजे पीड़िता ने अंतिम सांस ली।
    हाथरस की इस दुष्कर्म पीड़ित बेटी की मेडिकल परीक्षण में पता चला था कि युवकों ने गैंगरेप के बाद उसकी गर्दन और रीढ़ की हड्डियां को तोड़ दिया गया था।  पुलिस ने इस मामले में शुरू से ही लचीलापन दिखाया था और छेड़खानी के आरोप में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन इलाज के बाद 21 सितंबर को किशोरी के होश में आने के बाद हुए डॉक्टरी परीक्षण के दौरान मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि हुई। तब मामले ने तूल पकड़ लिया।
    गैंगरेप पीड़िता ने होश में आने पर बताया था कि आरोपियों ने उसकी जीभ काट दी थी, जिससे वह लोगों को घटना के बारे में ना बता सके। घटना के 9 दिन बीत जाने के बाद पीड़िता होश में आई तो अपने साथ हुई आपबीती अपने परिजनों को बताई। जब पीड़िता का डॉक्टरी परीक्षण हुआ तो इसमें गैंगरेप की पुष्टि होने के बाद हाथरस पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया। बाद में एक और आरोपी को अरेस्ट किया गया था।
     हरिजन बाल्मीकि समाज की गैंगरेप पीड़ित युवती की मौत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 लाख रुपये मदद की घोषणा की है। सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा है कि जो घटना है वो बेहद दुखद है। हमारे मुख्यमंत्री जी भी बहुत दुखी हैं। पूरी सरकार उस परिवार के साथ संवदेना प्रकट कर रही है। सरकार की तरफ से इसे मुआवजा नहीं कहना चाहिए पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की मदद दी जा रही है। परिवार वाले चाहते हैं कि सरकार की तरफ से सफदरगंज अस्पताल से बॉडी जल्द दिलवा दें तो सरकार उस दिशा में काम कर रही है। सरकार अपनी तरफ से हर संभव मदद कर रही है। मामले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, मामले में कठोर कार्रवाई होगी।
 हाथरस पुलिस ने स्वर्ण समाज के दोषी बलात्कारियों को बचाने के लिए शुरू से ही इस मामले में लापरवाही की। मामले ने सियासी तूल पकड़ा तब पुलिस हरकत में आई। गैंगरेप पीड़िता को पहले हाथरस से अलीगढ़ और फिर अलीगढ़ से दिल्ली भेजा गया।  



   बच्ची के साथ हैवानियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दबंगों ने बारी-बारी से उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। बेटी अपनी जुबान न खोल पाए इसलिए उसकी जुबान काट दी। चलकर अपने घर तक न जाए तो उसके रीढ़ की हड्डी तोड़ दी। इतनी हैवानियत के बाद भी वह आखिरी सांस तक जिंदगी के लिए जंग लड़ती रही। सियासत तेज होने पर पुलिस ऐक्शन में आई। अस्पताल में भर्ती बेटी को 9 दिन बाद होश आया। होश में आने के बाद उसकी कटी जुबान से वह कुछ बोल न सकी। इशारों में अपने साथ हुई दरिंदगी बयां की। बयान लेने पहुंचे सीओ ने बेटी के बयान को दो पन्नों में लिखा। आरोपियों की पहचान गांव के ही रहने वाले ठाकुर संदीप सिंह, ठाकुर लवकुश सिंह, ठाकुर रामू सिंह और ठाकुर रवि सिंह के रूप में हुई थी। हाथरस पुलिस अधीक्षक के अनुसार संदीप को 14 सितंबर को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद पुलिस ने रामू और लवकुश को गिरफ्तार किया। वहीं फरार चल रहे चौथे आरोपी रवि को 26 सितंबर को पुलिस ने गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया था।
 इस मामले में पुलिस ने लापरवाही भरा रवैया अपनाया। रेप की धाराओं में केस ना दर्ज करते हुए छेड़खानी के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया। इसके बाद उसके खिलाफ धारा 307 (हत्या की कोशिश) में मुकदमा दर्ज किया गया था। बेटी की आपबीती सुनकर हर कोई दहल गया। 
    भीम आर्मी से लेकर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने सरकार को निशाने पर लिया। सामूहिक दुष्कर्म की इस घटना को निर्भया पार्ट-2 का नाम दिया गया है। बिटिया के साथ इस कृत्य के बाद मानवता शर्मसार है। सामूहिक दुष्कर्म के बाद दलित बिटिया की जुबान काटी गई और भयानक जख्म दिए गए थे। इस मामले में चार लोगों को पीड़िता के बयान के बाद गिरफ्तार किया गया था, वरना पुलिस तो दरिंदों को बचाती रही। इस कांड के बाद पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज करने में आठ दिन लगा दिए थे।
    पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर ने पीड़िता की मौत की पुष्टि की है। सोमवार को हालत बेहद गंभीर होने पर उसे अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था। युवती की मौत के बाद उसके गांव और गांव जाने वाले रास्ते पर भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। खुद एएसपी प्रकाश कुमार इसकी कमान संभाले हुए हैं। मृतका  के शव का दिल्ली में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। वहां से शाम तक शव के यहां आने की उम्मीद है। हाथरस और अलीगढ़ से अतिरिक्त पुलिस फोर्स को दिल्ली भेजा गया है। पीड़िता को सोमवार की सुबह करीब 10 बजे लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के जरिए दिल्ली रेफर किया गया था। उसे सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 
   पीड़िता के भाई के अनुसार मंगलवार सुबह करीब चार बजे उसकी उपचार की दौरान मौत हो गई। दोपहर बाद उसका शव हाथरस लाने की संभावना है। सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता के भाई और स्वजनों में पीड़िता को एम्स में भर्ती न कराने को लेकर नाराजगी है। भाई का कहना है कि डॉक्टरों और पुलिस अधिकारियों ने उसे एम्स में भर्ती कराने की लिए बोला था, लेकिन उसे एम्स में न रखकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।।पीड़िता जब मेडिकल कॉलेज लाई गई थी तब उसे सांस लेने में दिक्कत थी। हालत खराब होने पर उसे वेंटीलेटर पर रखा गया। चिकित्सकों के अनुसार गर्दन में सात डिस्क होती हैं, जो रीड की हड्डी को जोड़ती हैं। युवती की दूसरी और तीसरी डिस्क में परेशानी थी। ऐसी स्थित में ब्रेन तो काम करता है, लेकिन मांसपेशी सही से काम नहीं करतीं। सर्वाइकल इंजरी के कारण उसके उसके हाथ, पैर काम नहीं कर रहे थे। 
    बाल्मीकि अनुसूचित जाति की पीड़िता को गंभीर हालत मेें 14 सितंबर की सुबह परिजन कोतवाली चंदपा लेकर आए थे। यहां से पुलिस ने उसको जिला अस्पताल भिजवाया, जहां से गंभीर हालत में अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया था। मां की तहरीर के आधार पर पुलिस ने गांव के ही संदीप पर जानलेवा हमला और एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज किया था। इधर लड़की की हालत में कई दिन तक सुधार नहीं आया। इस मामले की विवेचना कर रहे सीओ सादाबाद ब्रह्मसिंह ने पीडि़ता के बयान दर्ज किए। बयानों के आधार पर मामले में सामुहिक दुष्कर्म की धाराएं बढ़ाईं थीं। संदीप के साथ-साथ उसके तीन अन्य साथियों को भी नामजद किया गया। पुलिस चारों आरोपितों को जेल भेज चुकी है। इस दौरान उसका जेएन मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ के आईसीयू वार्ड में इलाज चल रहा था। इसके बाद उसको सोमवार को दिल्ली सफदरजंग हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया। अलीगढ़ में पीड़िता की हालत में यहां कोई सुधार नही दिख रहा था। जवाहर लाल नहरू मेडिकल कालेज अस्पताल के अधीक्षक डा. हारिस खान ने बताया कि पीड़िता की हालत अब भी गंभीर बनी थी वह जीवन रक्षक प्रणाली (वेंटीलेटर) पर थी। उसके परिवार के लोगों ने उसका इलाज दिल्ली में कराने की इच्छा जतायी तो इसके बाद उसे सोमवार की सुबह दिल्ली एम्स में भेज दिया गया।
  पुलिस अधीक्षक विक्रांतवीर के मुताबिक लड़की ने सामूहिक दुष्कर्म की वारदात के बारे में पुलिस को पहले कुछ नहीं बताया था मगर बाद में मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में उसने आरोप लगाया कि संदीप, रामू, लव कुश और रवि नामक युवकों ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया और विरोध करने पर जान से मारने की कोशिश करते हुए उसका गला दबाया। पीड़िताके भाई ने 14 सितंबर को थाना चन्दपा में लिखित सूचना दी कि संदीप पुत्र गुड्डु निवासी थाना चंदपा जनपद हाथरस ने आकर गला दबाकर पीड़िता की हत्या करने की कोशिश की। इसके बाद संदीप पुत्र गुड्डू उपरोक्त के विरुद्ध पंजीकृत किया गया था। विवेचना के क्रम में पीड़िता के बयान के आधार पर तीन अन्य लोग प्रकाश में आये। इसके बाद सभी नामजद की गिरफ्तारी की गई।
  रविवार को भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आज़ाद (रावण) तामाम पुलिस की नाकेबंदी को धता बंधाते हुए जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ में पहुंचे थे और परिजनों से मुलाकात के बाद पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी, और दोषियों को कड़ी सजा की मांग के साथ एम्स में इलाज की मांग की थी।
  योगी आदित्यनाथ जी की भाजपा सरकार में दलित उत्पीड़न के साथ गैर सवर्णों पर सवर्णों के अत्याचार पूरे उत्तर प्रदेश में बहुत बढ़ गए हैं।


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