भगवान के नाम पर भिखारी मांगते थे भीख, अब भाजपा मांगती है भगवान के नाम पर वोट

  भगवान के नाम पर भिखारी भीख में मिली चीज को कितना संजोकर रखता है या कितना कीमती बनाता है इसके बारे में आप खुद जानते ही होंगे। लेकिन जब भाजपा वाले आपसे वोट ही भीख में मांगते हैं तो आपको रोजगार का मार्ग उसी तरह का ही बातते हैं या आपको भिखारी बनाते हैं तो गलती भी आपकी ही। आज भाजपा ने फ्री गैस, फ्री शौचालय, फ्री अनाज, जनधन योजना, किसान सम्मान जैसी योजनाओं में 50 करोड़ से ज्यादा लोगों जोड़कर भिखारी की श्रेणी में तो डाल दिया लेकिन इनको योग्यता के अनुसार जरूरी रोजगार आज तक नहीं दे पा रहा है। मोदी जी 2 करोड़ रोजगार हर साल देने के वायदे पर 2014 में सत्ता में आये, लेकिन अब यह वायदा जुमला ही बनगया है।  मोदी सरकार द्वारासरकारी संशोधनों को प्राइवेट करके कुछ पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। मुकेश अम्बानी ने जहाँ कोरोना काल में 30 करोड़ रुपया प्रतिघंटा की कमाई की, तो दूसरी ओर जिनको कोरोना काल से पहले से ही नौकरी और रोजगार मिला हुआ था ऐसे 14 करोड़ से ज्यादा लोगों के रोजगार ही छीन लिये गए। जो प्रधानमंत्री अपने आप को एक चाय वाला दिखता और बताता है वो बेरोजगारी दूर करने के लिए पकौड़ा तलने का ही रास्ता दिखा सकता है। 


     इसलिए अपने भविष्य को ठीक करने के लिए, न भगवान के नाम पर और न हीं मुफ्त योजनाओं के नाम पर! अब वोट दो सुनिश्चित रोजगार के नाम पर।


     देश में इस बार बिहार में हो रहा चुनाव पहला चुनाव है जो रोजगार के नाम पर लड़ने के लिए मजबूर तेजस्वी यादव ने किया है। भाजपा और उसके गठबंधन के पास रोजगार के मुद्दे की काट का कोई रास्ता नहीं है तो, फिर राम मंदिर और पाकिस्तान के वोट मांगने की कोशिश की जा रही है, जिसको इस बार बिहार की जनता नकारती हुई नजर आ रही है।


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