17 अतिपिछड़ी जातियों के अनुसूचित जाति के आरक्षण के प्रस्ताव को मोदी सरकार ने बताया था असंवैधानिक : योगी सरकार ने आज तक नहीं की कोई पहल

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट। केंद्र की मोदी सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने 9 जुलाई 2019 को राज्यसभा में कहा था कि उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार का 17 पिछड़ी जातियों एससी जाति के आरक्षण का कदम उचित नहीं है और असंवैधानिक है। ओबीसी जातियों को एससी सूची में शामिल करना संसद के अधिकार में आता है। इसके लिए केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह 17 अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) को अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाणपत्र जारी करना बंद कर दे। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने राज्यसभा में कहा था कि राज्य सरकार का कदम उचित नहीं है और असंवैधानिक है। उच्च सदन में गहलोत ने कहा था, ‘ओबीसी जातियों को एससी सूची में शामिल करना संसद के अधिकार में आता है। सदन में थावरचंद गेहलोत ने इसके लिए राज्य सरकार को प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए कहा। लेकिन उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार ने अभी तक केंद्रीय मंत्री के इस निर्णय के बाद प्रक्रियाओं के तहत इन 17 अतिपिछड़ी जातियों को परिभाषित अनुसूचित जाति का आरक्षण देने के लिए लगभग पौने दो साल बाद भी कोई कदम नहीं उठाया है। 


(देखें वीडियो में योगी आदित्यनाथ जी का निषादों के आरक्षण के लिए लोकसभा में दिया गया भाषण, आज दे रहे हैं धोखा


 24 जून 2019 में 29 मार्च 2017 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के इन जातियों के 22 दिसम्बर 2016 के उत्तर प्रदेश की तत्कालीन समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार के मझबार, तुरैहा, गौंड, बेलदार, शिल्पकार की पुकारू जाती मानते हुए दिये अनुसूचित जाति के आरक्षण पर लगे स्टे को शर्तानुसार हटाये जाने  का हवाला देते हुए योगी आदित्यनाथ जी की सरकार ने   अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे जांच और नियमों के अनुसार दस्तावेजों पर आधारित 17 ओबीसी जातियों को एससी प्रमाणपत्र जारी करें। 

  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ जी की सरकार द्वारा 24 जून को जारी निर्देश के अनुसार, जिन 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की बात कही गई थी, उनमें कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी व मछुआ शामिल हैं। (वीडियो देखें जब 2019 के लोकसभा चुनावों में गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ जी ने मुख्यमंत्री रहते हुए अनुसूचित जाति के आरक्षण के वायदे के सहारे निषादों से वोट देने के लिए कहा था)

   इस मामले पर राज्यसभा में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने भी इसे असंवैधानिक कहते हुए एक बयान में कहा था, ‘उत्तर प्रदेश सरकार का यह आदेश इन 17 जातियों के साथ सबसे बड़ा धोखा है। इससे न तो इन जातियों को अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण का और न ही अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ मिलेगा। ”उन्होंने यह भी कहा था कि प्रदेश सरकार इस आदेश के बाद उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग नहीं मानेगी। वहीं, इन बिरादरियों को अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ इसलिए नहीं मिलेगा, क्योंकि कोई भी सरकार मात्र आदेश जारी करके न तो उन्हें किसी सूची में डाल सकती है और न ही हटा सकती है। राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा था कि सरकार 17 जातियों को एससी सूची में डालना चाहती है, क्योंकि ये जातियां सामाजिक और आर्थिक आधार पर बहुत ही पिछड़ी हैं। अधिकारी अपनी इस बात पर कायम थे कि इन जातियों को एससी सूची में डाले जाने से उन्हें कोटा और सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित की जाने वाली योजनाओं का लाभ मिलेगा। उधर सरकार के इस कदम से एससी समूहों को भय है कि उनके कोटा पर असर पड़ेगा और अगर आरक्षण की सीमा नहीं बढ़ाई जाती है तो नई शामिल होने वाली जातियां उनका हक बांट लेंगी। 

  यह पहला मौका नहीं था कि जब उत्तर प्रदेश में इन अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की कवायद की गई थी। इससे पहले जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने भी इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का आदेश जारी किया था। यह मामला अदालत पहुंचा था और कोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी थी। उसके बाद एक नई जनहित याचिका दायर हुई, जिसमें सरकार की उन रिपोर्ट्स को ही आधार बनाया गया था, जिसके तहत अनुसूचित जाति में इन जातियों को शामिल करने को कहा गया था। इन जातियों की मानव विज्ञान रिपोर्ट्स और जातियों की सामाजिक संरचना के आधार पर अदालत ने तब लगाई गई रोक हटा दी थी और मामले की सुनवाई जारी रखी थी। इससे पहले, अदालत की रोक हटने के बाद इन जातियों को अदालत के अंतिम फैसले के अधीन अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन लगभग सबा दो साल तक योगी आदित्यनाथ जी की भाजपा सरकार ने पूर्व की समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार के आदेश पर पारित इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया था। अब जब नए शासनादेश की प्रति को सारे कमिश्नरों व जिलाधिकारियों को भेजते हुए उनसे कहा गया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के अंतरिम आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए। इन जातियों को परीक्षण और सही दस्तावेजों के आधार पर एससी का जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए। यह प्रमाणपत्र कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन होगा।

   इससे पहले 2005 में समाजवादी पार्टी की मुलायम सिंह यादव सरकार द्वारा भी इन जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण लागू किया गया था। 

  दोनों ही बार गोरखपुर की संस्थाओं अंबेडकर ग्रंथालय और अंबेडकर संस्थान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे लिया था, लेकिन 22 दिसम्बर 2016 के अखिलेश यादव सरकार पर लिए गए स्टे को एक 29 मार्च 2017 को शर्तानुसार वेकेट किया गया था, लेकिन योगी सरकार ने अपना एफिडेविट इन जातियों के एससी आरक्षण के समर्थन में दाखिल ही नहीं किया था 2 साल से ज्यादा समय तक। बाद में सबा दो साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पालन के पालन के आदेश की जगह दुबारा इन जातियों को एससी में शामिल करने का शासनादेश जारी कर आरक्षण देने की जगह रोकने के लिए राज्यसभा में एक प्रोपेगैंडा के द्वारा छल ही किया है। क्योंकि पौने दो साल बाद भी इन जातियों के आरक्षण के लिए नई प्रकिया उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा नहीं किया जा सका है, जबकि लगातार राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा, विधान परिषद में उत्तर प्रदेश की इन जातियों को अनुसूचित जाति के लिए, जाटव, धोबी, की परिभाषित जातियों के आरक्षण की तरह की जा रही मांग और भाजपा के द्वारा वोट लेने के लिए किये गए वायदे के बाद भी न उत्तर प्रदेश, में बिहार में और न मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में दिल्ली, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा की तरह लाभ देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।

 2015 में उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद श्री विशम्भरप्रसाद निषाद जी ने अनुसूचित जाति के आरक्षण के लिए प्राइवेट मेम्बर बिल पेश किया था। और श्री विशम्भरप्रसाद निषाद जी आज भी राज्यसभा के सभी सत्रों में इनके आरक्षण के लिए अपनी आवाज उठाते रहे हैं।


2020 के संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा में 17 जातियों के आरक्षण को उठाया (https://www.eklavyamanavsandesh.com/2020/10/17.html)

11 दिसम्बर 2019 राज्यसभा में पूंछा प्रश्न https://www.eklavyamanavsandesh.com/2019/12/blog-post_17.html

विधान परिषद में समाजवादी पार्टी के एमलसी डॉ. राजपाल कश्यप जी द्वारा उठाया गया मामला

https://youtu.be/ec7wQHv5rbw


2015 में एकलव्य मानव संदेश हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र में छपी खबर को देखें


इस आरक्षण के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी बनाकर डॉ. संजय कुमार निषाद और उनका सांसद बेटा भाजपा की मिलीभगत से समाज को गुमराह कर रहे हैं।


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