अलीगढ़ के कोविड एल-2 हॉस्पिटल के स्टाफ को कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान नहीं मिल रहीं हैं कोई सुविधा- प्रशासन की इस लापरवाही से और भयंकर रूप ले सकता है कोरोना

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट। अलीगढ़ जनपद के कोविड-19 एल-2 हॉस्पिटल पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में कार्यरत मेडिकल स्टाफ (डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी स्टॉफ़) कोविड पॉजिटिव मरीजों की बीच में काम कर रहा है। इन कोरोना योद्धाओं को ना ही उनके खाने की सुविधा मिल रही है और ना ही उनको रहने के लिए होटल की सुविधा मिल रही है। जिससे कोविड पॉजिटिव मरीजों के बीच में काम करके घर पर जाने में इनको हर समय डर लगता है कि हमारी भी फैमिली है, हमारे भी छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनके संक्रमित होने का डर मन में सताता रहता है। इनको अपने छोटे-छोटे बच्चों का डर लगा रहता है कहीं वे भी संक्रमित ना हो जाएं। एकलव्य मानव संदेश से बात करते हुए पता चला कि ये मेडिकल स्टाफ शासन और प्रशासन से मांग करता है कि उनको पहले की तरह होटल में रहने की सुविधा और भोजन की व्यवस्था दी जाए, इस महामारी में पीड़ित लोगों के जीवन को बचाने के लिए, अपने परिवार से दूर रहकर कोविड अस्पताल में निडर होकर काम कर सकें।

    मेडिकल स्टाफ को इलाज के दौरान सरकार से मिलने वाली सुविधा के प्रावधान का एक पत्र भी एकलव्य मानव संदेश को प्राप्त हुआ है, जिसका अनुपालन इस कोडिड-19 भयंकर लहर में शासन प्रशासन द्वारा नहीं किया जा रहा है। 


डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व चतुर्थ श्रेणी स्टॉफ़, इन सभी से लगातार काम लिया जा रहा है, लगातार ड्यूटी लगाई जा रही है, कोई भी छुट्टी नहीं दी जा रही है। जो एक तरह से इनके साथ सरासर अन्याय हो रहा है। इनको भी तो अपनी जान का खतरा है। इनकी भी अपनी जिंदगी है और इनका भी परिवार है। शासन, प्रशासन इनकी समस्या को तत्काल ध्यान देकर कार्यवाही करे, जिससे कोरोना से जीवन को बचाने में लगे इन योद्धाओं को राहत प्रदान कर कोरोना के और ज्यादा फैलने से बचाने में मदद मिल सके।

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पैनिक हडबडाहट भारतीयों की बहुत बुरी आदत है
 ट्रेन आती है लोगों को उतरने देंगे नहीं, खुद पहले घुसेंगे, कही ट्रेन चली न जाए हम रह ना जाएं। सड़क पर थोड़ी भी जगह दिख जाए कहीं भी घुस जायेंगे, कुछ सेकंड में ही हॉर्न बजाने लगेंगे, गालिया देने लगेंगे, जैसे घर पे  बम डीफ्यूज करने जाना है, एक सेकंड की भी देरी हुई तो ब्लास्ट हो जायेगा। लॉकडाउन की बात हो तो बाजार में टूट पड़ेंगे सामान जमा करने के लिए, जैसे दुनिया ख़त्म हो रही हो।
   हमारी इसी आदत के कारण करोना भी मेनेज नहीं हो पा रहा है। केवेल 2 प्रतिशत लोगों को हॉस्पिटल में रखने, ऑक्सीजन की जरुरत होती है, केवेल 5 प्रतिशत को रेमदिसिवर की जरुरत होती है। अभी लोग पेनिक में हैं, सोचते हैं बाद में शायद बेड न मिले, ऑक्सीजन न मिले, अपने लक्षण बढ़ा चढ़ा के बताते हैं, और एडमिट होते है, कुछ तो नेता, मंत्री, कमिश्नर से जुगाड़ करके भी बेड ले रहे हैं। ऐसे कई लोगो को मैं देख रहा हूँ, जो बिलकुल स्वस्थ हैं, पर फिर भी 3-6 गुना ज्यदा पैसा दे के इंजेक्शन खरीद रहे हैं, इस डर से की बाद में कहीं हो गया तो, इंजेक्शन मिल जाए। हमारी इन्ही सब हरकतों के कारण ही कमी है, वरना जरुरतमंदों के लिए कोई कमी नहीं होती।
  जब आप घबराहट पैदा करने वाले पोस्ट विडियो फोटो शेयर करते है तो आप इसी को बढ़ावा देते हैं, कृपया न करें, सब चिताएं करोना की नहीं होतीं, 35 हजार लोगों की मृत्य रोज देश में स्वाभाविक होती है। 99.4 प्रतिशत लोग ठीक हो जाते हैं। लोगों का हौसला बढ़ाएं, घबराहट नहीं। एक समर्पित  नागरिक बनें।
दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी
आप सभी से भी अनुरोध है डबल मास्क पहनें, इस बार का कोरोना पिछले बार के कोरोना से कई गुना घातक है। सारे हॉस्पिटल भरे हुए हैं। हल्के से भी लक्षण हैं तो टेस्ट करा लें और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। इंटरनेट पर बहुत सारी जानकारी है लेकिन बहुत सारी भ्रामक और नुकसानदेह भी है अतः सिर्फ डॉक्टर की सलाह मानें। खुद बचिए और बचाइए

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