हम जीत जाएंगे, बशर्ते हमारा खुद पर विश्वास बना रहे - सन्दीप, डीआईओ

 कोरोना संक्रमण के संकट से निपटने के लिए जो सबसे सरल उपाय है वह स्वयं परअधिकाधिक काम करना। हम में से प्रत्येक को स्वयं को सुरक्षित रखने का प्रयास करना है। ठीक वैसे ही जैसे हवाई जहाज में हवा का दबाव कम होने पर सबसे पहले स्वयं को ऑक्सीजन मास्क लगाकर सुरक्षित रहने की सलाह दी जाती है। वैसा ही इस समय भी करना है, क्योंकि हमारी स्वयं की सुरक्षा ही अप्रत्यक्ष रूप से हमारे प्रियजन और परिजनों की सुरक्षा है। हमारी सुरक्षा ही हमारे समाज की एवं मोहल्ले की सुरक्षा है। इसलिए दो बिंदुओं पर बहुत आवश्यक रूप से कार्य करना है।पहला तो यह कि हम डॉक्टर नहीं हैं तो हमको कोरोना के विषय पर आवश्यकता से अधिक ज्ञान और जानकारी ग्रहण करने की और उसे आगे वितरित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम इसके विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए हो ये रहा है कि जो अतिरिक्त ज्ञान हम ग्रहण कर रहे हैं, वह अप्रत्यक्ष रूप से हमारी नकारात्मकता में वृद्धि कर रहा हो। विशेषज्ञता ना होने के चलते हम में इस ज्ञान को समझने-समझाने की पर्याप्त क्षमता नहीं है। यही कारण है कि इस कोरोना की आवश्यकता से अधिक जानकारी एक सामान्य व्यक्ति के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो रही है। हम अपने अधूरे ज्ञान का बखान अपने घर, परिवार और समाज में करके इस बीमारी के प्रति स्वयं तो मानसिक एवं शारीरिक रूप से और अधिक नकारात्मक होते ही जा रहे एवं अपने आसपास के लोगों की मानसिकता को भी दूषित-प्रदूषित कर रहे हैं। बस इतनी ही जानकारी पर्याप्त है कि घर से बाहर ना निकला जाए, अनिवार्य रूप से मास्क लगाया जाए, नियमित अंतराल पर सैनिटाइजर का उपयोग हो और हाथ सतत रूप से किसी भी साबुन से धोते रहें। इसके अलावा अन्य कोई भी जानकारी किसी भी नॉन मेडिको के लिए आवश्यक नहीं है। इसका दूसरा पक्ष हमारी मानसिकता से जुड़ा है। फेशियल मास्किंग के साथ मेंटल मास्किंग भी अति आवश्यक है, अन्यथा फेस मास्क का प्रभाव कम हो सकता है। हमको यह प्रयास करने हैं कि हम अधिक से अधिक सकारात्मक मानसिकता की ओर अपना ध्यान केंद्रित करें, तो संभव है कि हम सरलता से इस संकट से उबरने में सफल हो जाएंगे। 


     हम जीत जाएंगे, बशर्ते हमारा स्वयं पर विश्वास बना रहे। जो परिस्थितियां हमारे सामने हैं।उसमें परेशान होने के स्थान पर यह विचार करें, चिंतन मनन करें कि हम इन परेशानियों को परास्त कर लेंगे। मन को शांत रखें, इससे मन मे सकारात्मक विचार पैदा होंगे। इस हेतु योग-ध्यान, अच्छी चीजें पढ़ना-सुनना और देखना या ऐसा अन्य कुछ जो हमको हर्षित करे। मीडिया, सोशल मीडिया की नकारात्मकता के स्थान पर अपनों से, अपनों के बीच, अपनों के लिए समय व्यतीत करें लाभ होगा। नकारात्मक विचार भस्मासुर होते हैं, जो हमें ही भस्म करने का कार्य करते हैं, लेकिन हम अनेक अवसरों पर इसे समझ नहीं पाते। संक्रमण से हार जाने वालों की तुलना में संक्रमण से जीतने वालों की संख्या बहुत अधिक है। बल और विवेक से कार्य करें। जीत हमारी ही होगी।

-------------///----///----///------------
   पैनिक हडबडाहट भारतीयों की बहुत बुरी आदत है
 ट्रेन आती है लोगों को उतरने देंगे नहीं, खुद पहले घुसेंगे, कही ट्रेन चली न जाए हम रह ना जाएं। सड़क पर थोड़ी भी जगह दिख जाए कहीं भी घुस जायेंगे, कुछ सेकंड में ही हॉर्न बजाने लगेंगे, गालिया देने लगेंगे, जैसे घर पे  बम डीफ्यूज करने जाना है, एक सेकंड की भी देरी हुई तो ब्लास्ट हो जायेगा। लॉकडाउन की बात हो तो बाजार में टूट पड़ेंगे सामान जमा करने के लिए, जैसे दुनिया ख़त्म हो रही हो।
   हमारी इसी आदत के कारण करोना भी मेनेज नहीं हो पा रहा है। केवेल 2 प्रतिशत लोगों को हॉस्पिटल में रखने, ऑक्सीजन की जरुरत होती है, केवेल 5 प्रतिशत को रेमदिसिवर की जरुरत होती है। अभी लोग पेनिक में हैं, सोचते हैं बाद में शायद बेड न मिले, ऑक्सीजन न मिले, अपने लक्षण बढ़ा चढ़ा के बताते हैं, और एडमिट होते है, कुछ तो नेता, मंत्री, कमिश्नर से जुगाड़ करके भी बेड ले रहे हैं। ऐसे कई लोगो को मैं देख रहा हूँ, जो बिलकुल स्वस्थ हैं, पर फिर भी 3-6 गुना ज्यदा पैसा दे के इंजेक्शन खरीद रहे हैं, इस डर से की बाद में कहीं हो गया तो, इंजेक्शन मिल जाए। हमारी इन्ही सब हरकतों के कारण ही कमी है, वरना जरुरतमंदों के लिए कोई कमी नहीं होती।
  जब आप घबराहट पैदा करने वाले पोस्ट विडियो फोटो शेयर करते है तो आप इसी को बढ़ावा देते हैं, कृपया न करें, सब चिताएं करोना की नहीं होतीं, 35 हजार लोगों की मृत्य रोज देश में स्वाभाविक होती है। 99.4 प्रतिशत लोग ठीक हो जाते हैं। लोगों का हौसला बढ़ाएं, घबराहट नहीं। एक समर्पित  नागरिक बनें।
दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी
आप सभी से भी अनुरोध है डबल मास्क पहनें, इस बार का कोरोना पिछले बार के कोरोना से कई गुना घातक है। सारे हॉस्पिटल भरे हुए हैं। हल्के से भी लक्षण हैं तो टेस्ट करा लें और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। इंटरनेट पर बहुत सारी जानकारी है लेकिन बहुत सारी भ्रामक और नुकसानदेह भी है अतः सिर्फ डॉक्टर की सलाह मानें। खुद बचिए और बचाइए

एकलव्य मानव संदेश

खबरची मीडिया नहीं हैं, हम सामाजिक क्रांति के लिए कार्य करते हैं, इसलिए ऐसे महिला पुरुष साथी जो हमारे इस अभियान में साथ दे सकते हैं, वे अपने काम के साथ साथ हमारे प्रतिनिधि बनकर भी कार्य कर सकते हैं। अब एक नई पहल के अंतर्गत एकलव्य मानव संदेश के साथ जुड़ने वाले हर व्यक्ति का खुद का विज्ञापन एकबार हमारी मासिक पत्रिका में छापा जा रहा है। जिससे आपको देेेश और दुनिया में जान पहचान मिल सके। (अधिक जानकारी के लिए अंत में दिये गए मोबाइल और व्हाट्स नम्बरों पर कर सकते हैं) 



     एकलव्य मानव संदेश के प्रचारक, रिपोर्टर, ब्यूरो, ब्यूरो चीफ बनने पर आपको अपनी खबरों को प्रसारित करने के लिए प्रिंट और डिजिटल मीडिया के 10 प्लेटफार्म एक साथ मिल रहे हैं, जो इस प्रकार हैं- 

1. एकलव्य मानव संदेश हिन्दी सप्ताहिक समाचार पत्र।

2. एकलव्य मानव संदेश हिन्दी मासिक पत्रिका।

3. गूगल प्ले स्टोर पर ऐप - Eklavya Manav Sandesh

4. वेबसाइट - www.eklavyamanavsandesh.com

5. वेबसाइट - www.eklavyamanavsandesh.page

6. यूट्यूब चैनल Eklavya Manav Sandesh (30 हजार सब्सक्राइबर के साथ)

7. यूट्यूब चैनल Eklavya Manav Sandesh (6 हजार सब्सक्राइबर के साथ)

8. फेसबुक पेज - Eklavya Manav Sandesh

9. ट्विटर - Eklavya Manav Sandesh और Jaswant Singh Nishad

10. टेलीग्राम चैनल - Eklavya Manav Sandesh

(पूरी जानकारी इसी खबर के अंत में दी गई है, जिनको किलिक करके आप देख सकते हैं) 


 एकलव्य मानव संदेश हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन 28 जुलाई 1996 को अलीगढ़ महानगर के कुआरसी से दिल्ली निवासी चाचा चौधरी हरफूलसिंह कश्यप जी (वीरांगना फूलन देवी जी के संरक्षक चाचा) के कर कमलों के द्वारा दिल्ली के सरदार थान सिंह जोश के साथ किया गया था। 

  अब एकलव्य मानव संदेश साप्ताहिक समाचार पत्र के साथ- साथ अपनी मासिक पत्रिका भी प्रकाशित कर रहा है, जो अतिपिछड़ी जातियों के जन जागरण के कार्य में एकलव्य मानव संदेश के ही कार्यों को मजबूती के साथ आगे बढ़ाएगी।

    आप भी एकलव्य मानव संदेश मासिक पत्रिका को मंगाकर सामाजिक जागरूकता अभियान में सहयोग कर सकते हैं।  पत्रिका के सदस्य बनने के लिए आप इस समाचार के अंत में दिये गए नम्बरों पर सम्पर्क कर सकते हैं। 

     एकलव्य मानव संदेश का डिजिटल चैनल भी है (पूरी जानकारी इसी खबर के साथ नीचे दी जा रही है) जो डिजिटल क्रान्ति के माध्यम से देश और दुनिया में सामाजिक जागरूकता के कार्य में एक जाना माना ब्रांड बनकर उभर रहा है। 

आओ अब पत्रिकारिता के माध्यम सामाजिक एकता को मजबूत बनाएं.. 

  जिम्मेदार मीडिया की पहुंच अब सोशल मीडिया के अधिकांश साधनों के द्वारा देश और दुनिया के हर कोने में तक हो रही है, आप भी इसके साथ जूड़कर समाज को मजबूत और जागरूक कर सकते हो।

एकलव्य मानव संदेश की खबरें देखने के साधन-

1. गूगल प्ले स्टोर से Eklavya Manav Sandesh ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंकः https://goo.gl/BxpTre

2. वेवसाईटेंwww.eklavyamanavsandesh.com

www.eklavyamanavsandesh.Page

यूट्यूब चैनल- 2 हैं

Eklavya Manav Sandesh

लिंकः https://www.youtube.com/channel/UCnC8umDohaFZ7HoOFmayrXg

(30.5 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर)

https://www.youtube.com/channel/UCw5RPYK5BEiFjLEp71NfSFg

(6400 से ज्यादा सब्सक्राइबर)

फेसबुक पर- हमारे पेज

Eklavya Manav Sandesh

 को लाइक करके

लिंकः https://www.facebook.com/eManavSandesh/

ट्विटर पर फॉलो करें

Jaswant Singh Nishad

लिंकः Check out Jaswant Singh Nishad (@JaswantSNishad): https://twitter.com/JaswantSNishad?s=09

एवं

लिंकःCheck out Eklavya Manav Sandesh (@eManavSandesh): https://twitter.com/eManavSandesh?s=09

Teligram chennal 

https://t.me/eklavyamanavsandesh/262

आप हमारे रिपोर्टर भी बनने

और विज्ञापन के लिए

सम्पर्क करें-

जसवन्त सिंह निषाद

संपादक/प्रकाशक/स्वामी/मुद्रक

कुआर्सी, रामघाट रोड, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश, 202002

मोबाइल/व्हाट्सऐप नम्बर्स

9219506267, 9457311667






Popular posts
17 अतिपिछड़ी जातियों के अनुसूचित जाति के आरक्षण के प्रस्ताव को मोदी सरकार ने बताया था असंवैधानिक : योगी सरकार ने आज तक नहीं की कोई पहल
Image
अयाह शाह विधानसभा सीट से मा. विशम्भर प्रसाद निषाद जी हैं 2022 के संभावित उम्मीदवार
Image
सांसद मा. विशम्भर प्रसाद निषाद जी ने अपनी सांसद निधि से बने बारात घर का रामपुर में किया उद्घाटन
Image
पूर्व मंत्री मनोहर लाल जी की प्रतिमा के अनावरण के माध्यम से 2022 के चुनाव जीतने के लिए अखिलेश यादव ने किया चुनाव अभियान का श्रीगणेश
Image
इस सप्ताह (30 अगस्त 2020) का एकलव्य मानव संदेश हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र आपके लिए
Image