कोरोना महामारी : ठंडी चीजों से करें परहेज, गुनगुना पानी सेहत के लिए मुफीद-हकीम सन्दीप कुमार

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश, सू. वि. रिपोर्ट। कोविड-19 संक्रमण के दौरान घबराए नहीं, डटकर करें मुकाबला।

घरेलू उपचार के साथ ही, समय से इलाज के लिए कंट्रोल रूम को दें सूचना।

रोग प्रतिरोधक क्षमता, जागरूकता, समय से उचित इलाज से आप कोरोना को हरा सकते हैं।

तदबीर के साथ पेट के बल लेटने से आक्सीजन के स्तर को कर सकते हैं नियंत्रित।

ठंडी चीजों से करें परहेज, गुनगुना पानी सेहत के लिए मुफीद-हकीम सन्दीप कुमार 


कोविड-19 वैश्विक महामारी जो कि वर्तमान में भयावह रूप लेती जा रही है। ऐसे में हम सभी को अपनी शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना एक रक्षात्मक उपाय साबित हो सकता है। कोविड-19 वायरस से ग्रसित व्यक्ति में प्रारंभिक लक्षण के तौर पर सर्दी, जुकाम, हल्के बुखार के साथ गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है। शारिरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता शक्ति अच्छी हो तो सर्दी जुकाम के साथ-साथ कई बड़ी बीमारियों से भी व्यक्ति को शीघ्र निजात मिल जाती है। ऐसे में हम सभी को चाहिए कि संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए अपने अपने घरों में उपलब्ध सामग्री को नुस्खों के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।      

   आयुर्वेद-यूनानी पद्धति के अनुसार हर घर में आसानी से पाई जाने वाली हल्दी को एंटीबैक्टीरियल माना गया है, तो कम से कम हल्दी मिला दूध का सेवन कर अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि अवश्य कर सकते हैं। इसी प्रकार से हल्दी अदरक को हल्का भून कर मुंह में रखकर चबाने से गले की खराश को कम किया जा सकता है। हिंदू धर्म और आयुर्वेद में तुलसी को पूज्य और जीवनदायिनी माना जाता है। हम तुलसी की पत्तियों को पानी में उबालकर हल्के हल्के पीकर गले की खराश मिटा सकते हैं। नीबू को गर्म पानी में डालकर दिन में 3 से 4 बार पीने से गले की खराश और संक्रमण से सुरक्षित रह से सकता है। हमारे प्राचीन सनातनी इतिहास में कई बड़ी बीमारियों के लिए काढ़ा अचूक रामबाण दवा मानी गई है। आयुर्वेद के अनुसार तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, अदरक, लौंग, मुलैठी और मुनक्का का काढ़ा तैयार कर पीना सेहत के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है। ऋषि-मुनियों, वैद्य, हकीमों द्वारा तदबीर के साथ बनाया गया काढ़ा बड़े से बड़े ज्वर में मददगार माना गया है। बच्चों व बड़ों सहित सभी उम्र के व्यक्ति चवनप्राश का दैनिक सेवन कर अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। ठंडी चीजों से परहेज करें और हमेशा गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करें।

पेट के बल लेटने से आक्सीजन की कमी हो सकती है दूरः-

  समूचे प्रदेश में बढ़ते संक्रमण के बीच जहां संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, वहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता, जागरूकता और समय से उचित इलाज मिल जाने से बड़ी संख्या में मरीज स्वस्थ भी हो रहे हैं। वर्तमान में फैले संक्रमण के दौर में व्यक्ति यदि संक्रमित हो जा रहा है तो उसे या परिवार वालों को घबराने की जरूरत नहीं है। घरेलू उपचार के साथ कंट्रोल रूम को सूचना अवश्य दें, ताकि समय से जांच और इलाज मुहैया हो सके।

  यदि किसी कोरोना पाॅजिटिव व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है और आक्सीजन का स्तर 94 से घटकर नीचे आ रहा है तो ऐसे व्यक्ति को पेट के बल लेटकर एक तकिया को गर्दन के नीचे रखना चाहिए एवं एक तकिया को छाती के नीचे और दो तकिया पैर के टखने के नीचे रखते हुए 1 से 2 घंटे तक लेट सकते हैं या सो सकते हैं। कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति को सोते समय एक ही पोजीशन में नहीं लेटना चाहिए। वह सुनिश्चित करें कि 1 से 2 घंटे के अंतराल पर लेटने की स्थिति में बदलाव अवश्य होता रहे। देखने सुनने में यह बात मामूली लग सकती है लेकिन चिकित्सा जगत में ’’प्रोनिंग’’ जानी-मानी प्रक्रिया है, इससे षरीर में आक्सीजन लेने की प्रक्रिया में सुधार होता है और खून में आक्सीजन के लेबिल को नियंत्रित किया जा सकता है।

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पैनिक हडबडाहट भारतीयों की बहुत बुरी आदत है
 ट्रेन आती है लोगों को उतरने देंगे नहीं, खुद पहले घुसेंगे, कही ट्रेन चली न जाए हम रह ना जाएं। सड़क पर थोड़ी भी जगह दिख जाए कहीं भी घुस जायेंगे, कुछ सेकंड में ही हॉर्न बजाने लगेंगे, गालिया देने लगेंगे, जैसे घर पे  बम डीफ्यूज करने जाना है, एक सेकंड की भी देरी हुई तो ब्लास्ट हो जायेगा। लॉकडाउन की बात हो तो बाजार में टूट पड़ेंगे सामान जमा करने के लिए, जैसे दुनिया ख़त्म हो रही हो।
   हमारी इसी आदत के कारण करोना भी मेनेज नहीं हो पा रहा है। केवेल 2 प्रतिशत लोगों को हॉस्पिटल में रखने, ऑक्सीजन की जरुरत होती है, केवेल 5 प्रतिशत को रेमदिसिवर की जरुरत होती है। अभी लोग पेनिक में हैं, सोचते हैं बाद में शायद बेड न मिले, ऑक्सीजन न मिले, अपने लक्षण बढ़ा चढ़ा के बताते हैं, और एडमिट होते है, कुछ तो नेता, मंत्री, कमिश्नर से जुगाड़ करके भी बेड ले रहे हैं। ऐसे कई लोगो को मैं देख रहा हूँ, जो बिलकुल स्वस्थ हैं, पर फिर भी 3-6 गुना ज्यदा पैसा दे के इंजेक्शन खरीद रहे हैं, इस डर से की बाद में कहीं हो गया तो, इंजेक्शन मिल जाए। हमारी इन्ही सब हरकतों के कारण ही कमी है, वरना जरुरतमंदों के लिए कोई कमी नहीं होती।
  जब आप घबराहट पैदा करने वाले पोस्ट विडियो फोटो शेयर करते है तो आप इसी को बढ़ावा देते हैं, कृपया न करें, सब चिताएं करोना की नहीं होतीं, 35 हजार लोगों की मृत्य रोज देश में स्वाभाविक होती है। 99.4 प्रतिशत लोग ठीक हो जाते हैं। लोगों का हौसला बढ़ाएं, घबराहट नहीं। एक समर्पित  नागरिक बनें।
दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी
आप सभी से भी अनुरोध है डबल मास्क पहनें, इस बार का कोरोना पिछले बार के कोरोना से कई गुना घातक है। सारे हॉस्पिटल भरे हुए हैं। हल्के से भी लक्षण हैं तो टेस्ट करा लें और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। इंटरनेट पर बहुत सारी जानकारी है लेकिन बहुत सारी भ्रामक और नुकसानदेह भी है अतः सिर्फ डॉक्टर की सलाह मानें। खुद बचिए और बचाइए

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