कोरोना में ऑक्सीजन की कमी से हजारों लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं और जिम्मेदार राजनीति करने में व्यस्त हैं

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh) एकलव्य मानव संदेश एडिटोरियल रिपोर्ट। कोरोना महामारी संकट के बीच ऑक्सीजन की हो रही किल्लत को लेकर देशभर की अदालतें सरकारों को फटकार लगा रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ऑक्सीजन की सप्लाई पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से हो रही मौतें नरसंहार जैसा है। 


   ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई है। सरकार की चिंता लोगों की जान बचाने से अधिक अपनी छवि की है। चुनाव आयोग को हाई कोर्ट ने हत्यारा कहा तो वो भी सुप्रीम कोर्ट पहुँची लेकिन हुआ कुछ नहीं। 


   कोविड त्रासदी की भयावहता ने केंद्र की मोदी सरकार को 16 साल बाद पहली बार विदेशी मदद लेने पर मजबूर कर दिया, लेकिन इसे लेकर कई तरह के सवाल उठा दिये थे और कहा था कि भारत ने भी पूरी दुनिया को मदद की है इसलिए मदद लेने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि भारत में विदेशी मदद कई देशों से आ रही है लेकिन ये मदद जा कहाँ रही है?

  देश में की दूसरी लहर ने हर तरफ हाहाकार मचाया है। कुछ राज्यों में लॉकडाउन जैसी स्थिति है। इससे देश में अप्रैल में बेरोजगारी बहुत तेजी से बढ़ी है और लाखों रोजगार गंवा चुके हैं। मुंबई का एक थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिेग इंडियन इकोनॉमी  देश में बेरोजगारी के आंकड़े इकट्ठे करता है। पीटीआई ने उसकी रिपोर्ट के हवाले से खबर दी है कि अप्रैल में देश की बेरोजगारी दर करीब 8 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। यह 2021 के शुरुआती 4 महीनों की सबसे ऊंची बेरोजगारी दर है। मार्च में देश की बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत थी।

    इधर गोदी मीडिया की बेशर्मी को लेकर आम जन मानस कह रहा है कि चुनाव “ख़त्म” हो गया “रिज़ल्ट” आ चुका और आज शपथ भी हो गयी, अब तो बंगाल का पीछा छोड़ दो, देश में “हाहाकार” मचा है लोग आक्सीजन के बिना “दम” तोड़ रहे हैं।

ज़ी न्यूज़ के पत्रकार विश्व दीपक ने 1 साल 4 महीने बाद अपना इस्तीफा सौंप देते हुए ज़ी न्यूज़ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हमसे झूठा राष्ट्रवाद, हिंदू मुसलमान, देश को बांटने वाला अभियान चलवाया गया, कन्हैया कुमार पर और जेएनयू के छात्रों पर गलत प्रोपेगेंडा करवाया।

  ज़ी न्यूज़ के पत्रकार विश्व दीपक बधाई के पात्र हैं, उन्हेंने गोदी मीडिया ज़ी न्यूज़ की पत्रकारिता से इस्तीफा देकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत किया है। वे इस बात के लिए भी बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने ज़ी न्यूज़ पर देश को बांटना, झूठा राष्ट्रवाद, जेएनयू मे दंगे फैलाने का खुलासा किया है।

   कोरोना महामारी में भी भाजपा राजनीति कर रही है। देश में, प्रदेश में, इलाज के अभाव में, बेड, ऑक्सीजन, जीवनरक्षक दवाइयों व इंजेक्शन के अभाव में, रोज़ लोगों की जान जा रही है, सेकडो लोग रोज़ दम तोड़ रहे है, मुक्तिधाम- कब्रस्तान शवों से भरे पड़े हुए है। हज़ारों लोग अभी तक मौत के मुँह में समा चुके हैं, लेकिन भाजपा को उनकी चिंता नहीं, कभी दो आंसू उनके लिये नहीं बहाये, कभी उनके लिये धरने पर नहीं बैठे ? भाजपा पश्चिमी बंगाल की हिंसा पर देश भर में - प्रदेश में धरना दे रही है, कोरोना महामारी में भी विरोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं।

  कोरोना की इस महामारी की आज भारत में हकीकत यह है कि, कोई चैन से सो रहा है शहर बेचकर, कोई सुहाग बचा रहा जेवर बेचकर, बाप ने उमर गुजार दी घरोंदे बनाने में, बेटा उसकी सांसे खरीद रहा है घर बेचकर, बर्बाद हो गये कई घर दवा खरीदने में, कुछ लोगों की तिज़ोरी भर गई जहर बेचकर।

क्या बाकई हिन्दू खुशकिस्मत हैं??

आज जब हिन्दू सब जगह बेवजह मारे जा रहे हैं , दवा की कमी से, ऑक्सीजन की कमी से, अस्पताल की कमी से, तब उनकी मदद के लिए विश्व हिन्दू परिषद, घर घर जा रही है ? अक्सीजन लेकर, दवा लेकर! वो किसी हिन्दू को मरने नहीं दे रहे! हिन्दू की रक्षा में सदैव तत्पर विश्वहिन्दू परिषद् !

   बजरंग दल की तो जितनी तारीफ की जाए कम है, सड़कों पर रामनामी दुपट्टा डाले लड़के कितनी सेवा कर रहे हैं, कोई हिन्दू को कष्ट न हो, अस्पताल से लेकर शमशान तक, सेवारत पूरी फ़ौज है इनकी !!

   दुर्गा वाहिनी की महिलाये बिल्कुल चिंगारी की तरह जहाँ समस्या आयी, और ये हाजिर ! क्या मजाल कि किसी हिन्दू महिला को, कोई परेशानी हो, हर जगह मौजूद, हाजिर, अपनी जान पर खेलकर सेवा कर रही चिंगारियां !!

  और आरएसएस के तो कहने ही क्या हैं, कितना निस्वार्थ भाव से हर जगह, हमारी आज़ादी की लड़ाई से लेकर, कोरोना तक गली - गली, मोहल्ले - मोहल्ले हिन्दू रक्त की हर बूँद के लिए स्वयंसेवक न्योछावर हैं!! उन्हें जानकारी है न हर घर की, अभी थोड़े  दिन पहले तो आये थे राम मंदिर का चन्दा लेने! जैसे चंदे  के लिए आये थे, वैसे ही दवा, बिस्तर की व्यवस्था लिए घर घर पहुंच रहे हैं!! वो याद है--'दूध मांगोगे खीर देंगे, कश्मीर मांगोगे चीर देंगे' वाले, यही हैं न वीर। इसलिए कहते है 'गर्व से कहो, हम हिन्दू हैं !'

  कोई बताओ भाई, इन्हे हिन्दू मुश्किल में है और 'वो गर्व करना चाहता है!' आपके कहे अनुसार जाग भी गया है 'बस, सांस नहीं ले पा रहा !' वो जो सामान्य समय में हुंकार भरते थे, वो धर्म रक्षक आज कहीं नहीं हैं, कहीं नहीं!! सीएनएन कह रहा है कि टेस्ट हो जाएं तो लगभग 50 करोड़ लोग संक्रमित हैं !!

अस्पताल लूट रहे हैं!

बाहर मेडिकल वाला लूट रहा है!

टैक्सी वाला लूट रहा है!

शमशान वाला लूट रहा है!

मर जाओ तो घर वाले छूने से डर रहे हैं!

संकट इतना भीषण है कि बगल वाले मुल्ले दाह संस्कार कर रहे हैं!!

ये है वो हिन्दू एकता, जिसके लिए इस देश को पिछले दशक से रौदा जा रहा है !!

जब सड़क घर, अस्पताल सभी जगह हिन्दू खतरे में है, तब वो कह रहे हैं कि नहीं, केवल बंगाल में खतरे में है !

जिस मोदी के लिए हम परिवार में, मित्रो से लड़े थे वो आज कहाँ है, धर्मरक्षक कहाँ है ? कहीं नहीं हैं!

वो गली मोहल्ले ही आज काम आ रहे हैं, दौड़ रहे हैं!! अनगिनत कहानियां बन रही हैं, रोज लोग एक दूसरे के लिए देवदूत बनकर आ रहे है !

  सरदार "खालिस्तानियों" के गुरूद्वारे, सक्रिय हैं, घर - घर में जरूरी सामान, ऑक्सीजन, दवाईंयॉं पहुँचा रहे हैं! फ़्री अस्पताल चला रहे हैं...

किसान आंदोलन--जो मोदी जी के खिलाफ षड़यंत्र था, वो ऑक्सीजन का लंगर लगा रहे हैं!

   ब्लैक में बिकता बिस्तर, दवा हकीकत है, जो किसी धार्मिक एकता के नाम पर ढंकी नहीं जा सकती!

  हिन्दू या मुस्लिम होना एक संयोग है, कोई हमसे पूछा थोड़े ही गया था, किन्तु 'संयोगों' पर गर्व वही करते हैं, जिन्हे ये पता होता है कि उनके कर्म गर्व करने लायक नहीं, शर्म करने लायक हैं!!

  आसपास देखिये, इस विकट संकट में साथ वही खड़े है, जिनके बारे में दिन रात बताया गया कि इनसे आपको ख़तरा है!

गर्व करना है, तो पूर्वजों के बनाये ऐसे समाज पर गर्व करिये, जिसे तोड़ने वालों का आप साथ देते हैं, फिर भी संकट में ये आपके लिए आ खड़ा होता है!


    पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का मामला इतना सीधा नहीं है। सोशल मीडिया और कुछ खबरों को देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है कि तृणमूल के लोग बीजेपी के लोगों पर हमला कर रहे हैं। लेकिन ​ये सिर्फ एक पक्ष है। चुनाव नतीजे के बाद राज्य में कम से कम 12 लोग मारे गए हैं। बीबीसी की खबर के मुताबिक, बीजेपी ने दावा किया है कि उनके छह कार्यकर्ता मारे गए। पुलिस ने 12 मौतों की पुष्टि की लेकिन यह नहीं बताया है कि मृतक किस पार्टी से जुड़े थे।

   मीडिया ये खबर चला रहे हैं कि टीएमसी के कार्यकर्ता हिंसा कर रहे हैं, लेकिन वह ये नहीं पूछ रहे हैं कि मारे गए 12 लोगों में छह बीजेपी के हैं तो बाकी छह कार्यकर्ता किसके हैं? उन्हें किसने मारा? क्या बीजेपी भी इस हिंसा में बरा​बर की भागीदार नहीं है? 

    भाषा की खबर के मुताबिक, बर्धमान में मारे गए चार लोगों में तीन तृणमूल के हैं और एक बीजेपी का। इस बारे में पूछने पर बीजेपी ने कहा कि ये 'लोगों की प्रतिक्रिया' का नतीजा है। हुगली में भी एक तृणमूल कार्यकर्ता मारा गया और तीन घायल हैं। जेपी नड्डा और कैलाश विजयवर्गीय के बयान को ही अंतिम सच मानकर बहस की जा रही है। इन्हीं नेताओं के बयान को हेडिंग बना दिया जा रहा है। अगर जेपी नड्डा का दावा सच है तो ममता बनर्जी का दावा सच क्यों नहीं है? इन दोनों में से जो भी दोषी है, क्या वह मीडिया को बताएगा कि वह हिंसा कर रहा है?  मीडिया न तो खुद खोजबीन कर रहा है, न किसी से सवाल पूछ रहा है, न अपने से कोई स्वतंत्र रूप से कोई दावा करने की स्थिति में है। 

   ये सच है कि तृणमूल चुनाव जीती है और इस हिंसा के लिए उसकी पहली जिम्मेदारी बनती है, लेकिन ऐसा लगता है कि मीडिया बीजेपी के आरोप को ही अंतिम सच मानकर रिपोर्ट कर रही है। आरोप दोनों लगा रहे हैं तो दोनों से सवाल क्यों नहीं होना चाहिए? ये सब जानते हैं कि टीएमसी हिंसा का सहारा लेती है। उससे पहले वामपंथियों पर हिंसा का आरोप लगता था और उनकी हिंसा को टीएमसी की हिंसा ने मात दे दी। अब बीजेपी अपनी हिंसा से टीएमसी की हिंसा को जीतना चाहती है। बंगाल की राजनीति में हिंसा सबसे कारगर हथियार है और टीएमसी की तरह बीजेपी भी उसी हथियार पर अपना हाथ साफ कर रही है। बाकी हिंसा और दंगा के मामले में बीजेपी का रिकॉर्ड जगजाहिर है। दिल्ली में क्या हुआ था, ये दुनिया देख चुकी है। 

  ऐसा लगता है कि यह कोरोना की ​वि​भीषिका से ध्यान हटाने की साजिश है ताकि लोग हिंसा और हत्या में उलझे रहें, ये कोई न पूछे कि साल भर में आक्सीजन प्लांट क्यों नहीं लगे?

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पैनिक हडबडाहट भारतीयों की बहुत बुरी आदत है

 ट्रेन आती है लोगों को उतरने देंगे नहीं, खुद पहले घुसेंगे, कही ट्रेन चली न जाए हम रह ना जाएं। सड़क पर थोड़ी भी जगह दिख जाए कहीं भी घुस जायेंगे, कुछ सेकंड में ही हॉर्न बजाने लगेंगे, गालिया देने लगेंगे, जैसे घर पे  बम डीफ्यूज करने जाना है, एक सेकंड की भी देरी हुई तो ब्लास्ट हो जायेगा। लॉकडाउन की बात हो तो बाजार में टूट पड़ेंगे सामान जमा करने के लिए, जैसे दुनिया ख़त्म हो रही हो।

   हमारी इसी आदत के कारण करोना भी मेनेज नहीं हो पा रहा है। केवेल 2 प्रतिशत लोगों को हॉस्पिटल में रखने, ऑक्सीजन की जरुरत होती है, केवेल 5 प्रतिशत को रेमदिसिवर की जरुरत होती है। अभी लोग पेनिक में हैं, सोचते हैं बाद में शायद बेड न मिले, ऑक्सीजन न मिले, अपने लक्षण बढ़ा चढ़ा के बताते हैं, और एडमिट होते है, कुछ तो नेता, मंत्री, कमिश्नर से जुगाड़ करके भी बेड ले रहे हैं। ऐसे कई लोगो को मैं देख रहा हूँ, जो बिलकुल स्वस्थ हैं, पर फिर भी 3-6 गुना ज्यदा पैसा दे के इंजेक्शन खरीद रहे हैं, इस डर से की बाद में कहीं हो गया तो, इंजेक्शन मिल जाए। हमारी इन्ही सब हरकतों के कारण ही कमी है, वरना जरुरतमंदों के लिए कोई कमी नहीं होती।

  जब आप घबराहट पैदा करने वाले पोस्ट विडियो फोटो शेयर करते है तो आप इसी को बढ़ावा देते हैं, कृपया न करें, सब चिताएं करोना की नहीं होतीं, 35 हजार लोगों की मृत्य रोज देश में स्वाभाविक होती है। 99.4 प्रतिशत लोग ठीक हो जाते हैं। लोगों का हौसला बढ़ाएं, घबराहट नहीं। एक समर्पित  नागरिक बनें।

दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी

आप सभी से भी अनुरोध है डबल मास्क पहनें, इस बार का कोरोना पिछले बार के कोरोना से कई गुना घातक है। सारे हॉस्पिटल भरे हुए हैं। हल्के से भी लक्षण हैं तो टेस्ट करा लें और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें। इंटरनेट पर बहुत सारी जानकारी है लेकिन बहुत सारी भ्रामक और नुकसानदेह भी है अतः सिर्फ डॉक्टर की सलाह मानें। खुद बचिए और बचाइए।


एकलव्य मानव संदेश

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 एकलव्य मानव संदेश हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन 28 जुलाई 1996 को अलीगढ़ महानगर के कुआरसी से दिल्ली निवासी चाचा चौधरी हरफूलसिंह कश्यप जी (वीरांगना फूलन देवी जी के संरक्षक चाचा) के कर कमलों के द्वारा दिल्ली के सरदार थान सिंह जोश के साथ किया गया था। 

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